About Us

हमारे बारे में

भारतमाता संस्कार सेवा ट्रस्ट

भारतमाता संस्कार सेवा ट्रस्ट राजस्थान के सांचोर जिले के रानीवाडा तहसील के अदेपुरा गांव के निकट बडगाँव- रानीवाडा मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह एक अलाभकारी धार्मिक संस्था है जो देश के एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान भारतमाता मंदिर हरिद्वार की शाखा और अनुषंगी संगठन के रूप में कार्य कर रही है। संस्थान के विधि एवं नियम तथा सेवा विवरण आदि गतिविधियां राजस्थान के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में पंजीबद्ध है तथा भारत सरकार के नीति आयोग में पंजीबद्ध है।

इस संस्थान के मुख्य संचालक एवं चेयरमेन ऋषि ज्ञानआत्मानंदजी महाराज योगीराज स्वयं आत्मानंद गिरीजी महाराज के शिष्य एवं भारतमाता मंदिर के संस्थापक निवृत शंकरराचार्य परमपूज्य स्वामी सत्यमित्रानंद गिरीजी महाराज के पौत्र शिष्य है। वर्तमान में शीर्ष संस्था भारतमाता मंदिर हरिद्वार के प्रमुख पद पर परम पूज्य जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरीजी महाराज विराजित है। वह एक अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धर्माचार्य एवं सनातन धर्म के प्रमुख प्रतिनिधि है जिन्होंने दस लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षित कर राष्ट्रीय सनातनी सेना के तौर पर संगठित किया है।

भारतमाता संस्कार सेवा ट्रस्ट रानीवाडा के सप्त ऋषि गुरुकुल और निर्वाण योगाश्रम के भवन का शिलान्यास श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ न्यास के कोषाध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गोविन्ददेवगिरीजी महाराज द्वारा दिनांक 10.5.2024 को किया गया। इस अवसर पर भारतमाता संस्कार सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भगवद् गीता ज्ञानयज्ञ, 108 कण्डीय भारतमाता व सीयाराम आराधना महायज्ञ, कन्या सस्कार शिविर एवं अक्षय तृत्तीया महोत्सव में हजारों की संख्या में रानातन धर्म प्रेमी एवं राष्ट्र निष्ठावान भारतमाता सेवकों ने भाग लिया।

ऋषि ज्ञानआत्मानंदजी महाराज संस्कार शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण पर जोर दे रहे है। उनका मुख्य संदेश यही है कि देश के नागरिक यदि संस्कारवान और चरित्रवान है और उनका राष्ट्र के प्रति निष्ठाभाव है तो राष्ट्र की एकता और अखंडता अक्षुण्ण बनी रहेगी, राष्ट्र शक्तिशाली बनेगा और शक्तिशाली राष्ट्र के नागरिक सदैव शान्ति, सुरक्षा और सम्मान का जीवन जियेंगे। राष्ट्र के नागरिकों में राष्ट्र के प्रति निष्ठाभाव जगाने के लिये वह राष्ट्र की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं की धरोहर और श्रीमद्भगवतगीता के भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों में निहित निष्काम कर्म सेवाभाव को जीवन में धारण करने पर जोर देते है। उनके सत्संग कार्यक्रम पूर्णतः कन्याओं को संस्कारवान बनाने, ऐसी कन्याओं से वीर और सेवा भाव युक्त राष्ट्र सेवक संतान उत्पन्न करने और मा भारती की सेवा के लिये सदैव तत्पर रहने के प्रेरणा पूर्ण और ओजस्वी होते हैं।

उनका यह एकनिष्ठ मत है कि राष्ट्र के नागरिक संस्कारवान, चरित्रवान वीर, और सेवा भावी होंगे तो ऐसे राष्ट्र का कभी भी पराभव नहीं हो सकता और उस राष्ट्र के नागरिक अपने कर्तव्य कर्मों को करते हुए परमात्म कृपा प्राप्त कर सद्गति और मुक्ति के लिये प्रवृत्त होंगे।

About

Donation

There are many variations of lorem passagei of Lorem Ipsum availabl

Donate Now

Volunteer

There are many variations of lorem passagei of Lorem Ipsum availabl

Join Now

Fundraise

There are many variations of lorem passagei of Lorem Ipsum availabl

Read More

हमारी टीम से मिलिए

"हमारी टीम से मिलिए" में, हमारी चैरिटी के समर्पित सदस्यों और उनके योगदानों से परिचित हों।

वीडियो